विचार भूमि

पहले राष्ट्र..

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अरुणेश मिश्रा सीतापुरिया


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जमीन मेरी, मर्जी तेरी

Posted On: 24 Feb, 2015  
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Others Politics पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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क्या केंद्र अलोकप्रिय ?

Posted On: 11 Feb, 2015  
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Politics social issues पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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‘आप’ की ज़रुरत !!!

Posted On: 18 Jan, 2015  
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Others Politics पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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सांप्रदायिक सरकारों को जवाब

Posted On: 19 May, 2014  
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Others Politics पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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ओ सैनिक…

Posted On: 8 Aug, 2013  
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Hindi Sahitya Others Others कविता में

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कालिंदी !!!

Posted On: 15 May, 2013  
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Others मेट्रो लाइफ लोकल टिकेट में

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सेना-अध्यक्ष महोदय,

Posted On: 5 May, 2013  
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Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस लोकल टिकेट में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: Arunesh Sitapuriya Arunesh Sitapuriya

के द्वारा:

ये चुनाव सभी पार्टियों के लिए आंख खोलने वाले होने चाहिए, कि वो वक़्त चला गया जब देश में लहर होती थी और पार्टी के नाम पर लोग आंख मूँद कर वोट डाल देते थे. आज आप को अपना चरित्र और सही उमीदवारों का चयन दोनों पर ध्यान देना होगा. एक कुख्यात लेकिन जिताऊ उमीदवार आप को एक सीट तो दिला देगा लेकिन उसकी वजह से आप की बीस और सीटें चली जायेंगी. ये उन युवा मुख्यमंत्रियों के लिए भी एक सबक होगा, जिन्होंने ने लैपटॉप तो बाँट दिए, लेकिन बिजली नहीं दे पा रहे हैं, प्रदेश को. जो कानून की बात तो कर रहे हैं और साथ ही बाहुबलियों को मंत्री भी बना रहे हैं. ये परिणाम सब नेताओं के लिए सबक है, कि आप को या तो काम करना पड़ेगा या फिर घर पर आराम. आदरणीय अरुणेश मिश्र जी, सादर अभिवादन! पहली बार किसी भाजपा समर्थित लेखक का बेबाक विश्लेषण पढ़ने को मिला ... आप बधाई के पात्र हैं. भाजपा को जबरदस्त आत्ममंथन की जरूरत है नहीं तो फिर वही होनेवाल है "न माया मिली न राम!" पुन: आभार और बधाई!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

हिंदुस्तान सरकार तो अपना इक़बाल खो ही चुकी है, हमें सजग रहना होगा की कहीं यही सोच दुनिया, भारतीय फौजों के ले लिए भी न बना ले. भारतीय सिपाहियों के सर काट के ले जाने वालों को अभय दान, भारत भूमि पर जबरन कब्ज़ा करने वालों को सम्मान, भारतीय फ़ौज की परम्परा नहीं रही है. लोकतंत्र का पालन अपनी जगह है, राष्ट्र हित अपनी जगह. सलमान खुर्शीद और मनमोहन सिंह जैसे नेता सिर्फ नमक का हक अदा कर रहे हैं अपने मालिक के प्रति, लेकिन भारतीय फौजों को मिट्टी का हक अदा करना होगा. हमें उम्मीद है आप हिंदुस्तान के इतिहास में ऐसे सेना अध्यक्ष के रूप में अपना नाम नहीं लिखवाना चाहेंगे, जिनकी सरपरस्ती में सैनिको के सर कटते रहे, हिंदुस्तान की जमीने छिनती रही, और सेना भ्रष्ट, नकारा सरकार के सामने नतमस्तक रही हो.बेहतर लेखन

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: Arunesh Mishra Arunesh Mishra

के द्वारा: Arunesh Mishra Arunesh Mishra

सबसे अधिक आश्चर्य उन राजनीतिक दलों के व्यव्हार से हुआ, जो अपने आप को देश के सबसे पिछड़े और गरीब लोगो का नुमाइन्दा बताते हैं. इसको जनता के साथ, मजाक ही कहा जायेगा कि, सपा और बसपा ने FDI का समर्थन इस लिए किया क्योकि वो साम्प्रदायिकता का विरोध करते हैं. इन नेताओ से ये सवाल पूछा जाना चाहिए, कि वो राजनीति, मुद्दों के आधार पर कर रहे हैं या किसी पार्टी के नाम पर. उनसे पूछा जाना चाहिए, की FDI और साम्प्रदायिकता में क्या सम्बन्ध है. उनसे पूछा जाना चाहिए कि, आखिर वो कब तक साम्प्रदायिकता का नाम ले कर देश के साथ इस तरह ही छल करते रहेगे. ये अपने अपने फायदे के लिए राजनीती है मित्रवर देश के फायदे के लिए नहीं ! अच्छा लिखा आपने

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आप ने बहुत ही अच्‍छे लेख लिखे है , मैने आपके सभी लेख पढे है आपके मन मे जो देश के लिए पीड़ा है मै उसका सम्‍मान करता हु, आप देश से बाहर होकर भी देश के लिए सोच रहे है लेकिन जो इस देश मे है उन्‍हे इसकी चिन्‍ता नही है क्‍योकि वह सोचते है कि हमसे क्‍या मतलब है, आज अन्‍ना जी ने देश को एक दिशा दी लेकिन देश के लेाग उस पर चलना ही नही चाहते वरना यह आन्‍दोलन अब तक सफल हो गया होता लेकिन हम हारे नही है हम संघर्ष नही छोडेगे, आप जैसे लोगो को हौसला मिलता रहा तो हम देश को जरूर बदल सकेगे मै भी देश हित मे अन्‍ना के साथ हु और अपना नौकरी छोड कर देश हित मे काम कर रहा हु क्‍योकि परिवार तो चल जोयेगा लेकिन जो देश का सेवा का अवसर मिला है पता नही फिर किसी जन्‍म मे मिलेगा कि नही सत्‍स प्रकाश 9198431217

के द्वारा:

के द्वारा: Piyush Pant, Haldwani Piyush Pant, Haldwani

के द्वारा: Arunesh Mishra Arunesh Mishra

के द्वारा: Arunesh Mishra Arunesh Mishra

के द्वारा: Arunesh Mishra Arunesh Mishra

के द्वारा:

के द्वारा: nishamittal nishamittal

के द्वारा: sumityadav sumityadav

के द्वारा: Arunesh Mishra Arunesh Mishra

बहुत सही बात कही आपने .. मैं आपसे १००% सहमत हूँ .. ---------------------------------------------------------------------------------------------------------- खुद को कमजोर और मजबूर दिखा कर के सहानभूति तो हासिल करी जा सकती है लेकिन समस्याएं हल नहीं. देश उनको प्रधानमंत्री के तौर पर माफ़ कर भी देगा अगर वो अब भी इक्षाशक्ति दिखाए, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की और दोषियों के खिलाफ निर्णायक करवाई करने की; वरना कही ऐसा न हो की वो भी एक ऐसे शासक की तरह से याद किये जाये जैसा कि “नीरो” के बारे में कहा जाता है कि जब सारा रोम जल रहा था तब राजा “नीरो” बेफिक्री में जी रहा था -------------------------------------------------------------------------------------------------------- ये बहाने बाजी है और कुछ नहीं -------------------------------------------------------------------------------------------------------- सियासत की गली में हर मगर का नाम चूहा है | ये चूहे आदमी का मांस तल कर खा रहे हैं अब ||

के द्वारा: Shailesh Kumar Pandey Shailesh Kumar Pandey

के द्वारा: Arunesh Mishra Arunesh Mishra

के द्वारा:

अरुणेश जी ... नमश्कार नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये.. आपको और आपके माध्यम से पुरे मंच को देना चाहता हु ... कुछ समस्याओं के कारण काफी दिन मंच से दूर रहा .. २०११ का पहला लेख आपका ही पढ़ रहा हु.... चाणक्य वास्तव में भारत के पहले वैज्ञानिक राजनितिक विचारक थे और अर्थशाश्त्र पहली वैज्ञानिक राजनितिक रचना ... आज जबकि आतंरिक नीति और वाह्य नीतियों में सामंजस्य बैठने में नीतियों की व्यावहारिकता को समझने में राज्य सफल नहीं हो प् रहा है तो ऐसे में हमारे इतिहास में चाणक्य के रूप में बहुत बड़ा शिक्षक मौजूद है .. जो हमारे राष्ट्र ,, नागरिक और प्रशाशन की आधारशिला है ... चाणक्य को समझना उन्हें पढना बेहद रोमांचक है ... जिस तरह उन्हें चन्द्रगुप्त मौर्या की क्षमताओं को समझा और उसका भरपूर प्रयोग किया ऐसे प्रयोग आज के दौर में असंभव लगते है अपने शिष्य का अंगूठा काट लेने वाले गुरु बहुत मिलेंगे .. पर चाणक्य जैसा पारखी और अपने शिष्य की पूरी क्षमताओं को राष्ट्र के हित में लगाने की प्रेरणा देने वाले गुरु चाणक्य जैसे उदाहरण नहीं दीखते .... एक महँ ऐतिहासिक चरित्र को बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत करने के लिए आपको बधाई ..

के द्वारा:

के द्वारा:

कहा जाता है कांग्रेस में कोई हाई कमांड की इजाज़त के बिना कोई छींक भी नहीं सकता है. मेरी समझ से दिग्विजय सिंह यह सब अपने आप नहीं कह रहे हैं. हाई कमांड द्वारा उनसे कहलाया जा रहा है. उद्देश्य है मुसलमानों का भय दोहन. हिन्दू आतंकवाद का खतरा दिखाकर मुसलमानों की सहानुभूति और वोट प्राप्त करना. आजमगढ़ भी इसी कारण तीर्थ यात्रा का केंद्र बना हुआ है. यह सब एक रणनीति के तहत किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश के चुनाव जो आसन्न हैं और राहुल गाँधी को राजनीति के केंद्र में स्थापित जो करना है. प्रधान मंत्री पद के लिए राहुल गाँधी का मार्ग प्रशस्त करना है.आशा है मुसलमान इस चाल को समझते होंगे. यह रणनीति सेक्युलर स्पेस के केंद्र में अपने को स्थापित करने में दिग्विजय सिंह के भी माफिक आती है.

के द्वारा:

प्रिय मिश्र जी आप अमेरिका को उसके द्वार पर जाकर देख आये बधाई आतंकवाद से लड़ने की अमेरिकी इच्छाशक्ति और उसकी तत्परता का आपने अच्छा बखान किया होना भी चाहिए क्योंकि अमेरिकी अपने देश की रक्षा करने में समर्थ जो हैं ? परन्तु आपको यह भी याद करना चाहिए की अमेरिका भी आतंकवाद का गंभीर शिकार हो चूका है / यह भी याद करने की बात है की अपने देश से बाहर अमेरिका की कुछ नहीं कर सका है चाहे वियतनाम, ईराक , इरान या तजा तजा अफगानिस्तान हो अपनी पूरी ताकत लगाने के बाद भी मजबूर है आतंकवाद को समाप्त नहीं कर सका / आप को यह भी याद रखना चाहिए की दुनिया में सबसे बढ़ा आतंकवाद का पोषक अमेरिका ही है / अब रही बात भारत की तो यह समस्या बाहर की नहीं है यह घर के अन्दर की है जो कल तक दो भाई की तरह रह रहे थे वह आज अलग अलग है और दोनों ओर के नेता अपने अस्तित्व को बचने के लिए जनता को बेवकूफ बनाते रहते है साथ ही हमें ओर आप को यह भी याद रखना चाहिए की हमने पडोसी की हरकतों से तंग आकर जब उसके एक बाजू को (आज का बंगला देश ) काट अलग कर दिया था आपने तो वह अपने दर्द को भूला नहीं है ओर एइसा कोई भी मौका अपने हाथ से निकलने नहीं देता जब की वह हमारे देश से बदला लेने की कोशिस न करता हो आज हमारे सामने कश्मीर की हालत सब कुछ बयां कर रही है परन्तु हमारे सैनिकों में तो दम है लेकिन नेताओं के दम के विषय में आप अधिक जानते होंगे / भारत में आतंकवादी घटनाओं के सन्दर्भ में एक ही कारण है वह यह की स्थानीय हमदर्दों का साथ चूँकि धर्म तथा बेटी रोटी की आड़ में सब कुछ छुपाने की मानसिकता काम करती है इसलिए जबतक या तो हम कश्मीर को थाल में सजा कर पाकिस्तान को भेट कर दे या १९७१ की तरह एक ओर फौजी कार्यवाही के लिए तैयार रहें तथा कश्मीर की समस्या को हमेशा के लिए समाप्त कर दे तब आप देखेंगे की भारत कितना समप्पन एवं शक्तिशाली देश है / सबसे बढ़ी समस्या हमारे देश की यह है की सरकारें बदलने के बाद नए नए प्रयोग होने लगते है जैसे की RAW नाम की एक संस्था है जो की सीधे प्रधान मंत्री के निर्देश/नियंत्रण में हमारे देश के हितों की देख भाल के लिए विदेशों में कार्य करती है परन्तु एक प्रधान मंत्री ऐसे हुए जिसने सब सिस्टम को भंग कर दिया था जिसका खामियाजा हमें पंजाब प्रान्त में भुगतना पड़ा था / आप का यह कथन ...अगर भारत सरकार पूरी इक्षाशक्ति और क्षमता के साथ आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का मन बना ले तो भारत के सुरक्षाबल और एजेंसियां दुनिया के किसी भी दुश्मन को ढूँढने और ख़तम करने में सक्षम है; लेकिन वह होगा कब...... आपकी इस बात में दम है ओर हमें आशा रखनी चाहिए की ऐसा एक दिन जरूर आएगा आपकी तरह हम भी इसी आश में जिन्दा हैं

के द्वारा:

आपने लेख का शीर्षक रखा है, “असली असलियत” बहुत से लोग आज बाबा राम देव को पूज रहे हैं कुछ कल पूजेंगे और जो नहीं पूज रहे है वह भी पूजेंगे कभी न कभी पुजेगें पर जब लोगो को असली असलियत पता चलेगी तो क्या करेंगे ? यह एक सवाल भी है और समस्या भी ? हमारा देश धर्मभीरु देश है यहां हर आदमी की दूकान चल जाती है यहं काला जादू से लेकर नीम हकीम भी धड़ल्ले से अपनी अपनी दूकान चला रहे है जिसका अपना कोई भविष्य नहीं है वह भी सड़क के किनारे बैठ कर लोगों का भविष्य एक रुपये से एक हजार रुपये में बता देता है ?............. मै अब एक खरी बात कहने जा रहा हूँ जो इस प्रकार से है की क्या आप को पता है की बाबा राम देव का योग सिखाने वाला कार्यक्रम जब शुरू हुआ था तो उसकी फीस क्या थी और उसमे गरीबो की हिस्से दारी कितनी थी अगर आप को नहीं पता तो मै बता देता हूँ की उसकी फीस हजारों में थी तथा किसी गरीब का कोई हिस्सा नहीं था ! क्या आप को पता है की बाबा राम देव द्वारा संचालित विभिन संस्थाओं की कुल संपत्ति कितनी है उनकी दावा की फैक्ट्री की स्तिथि क्या तथा वहां की बनी दवाओ की कीमत तथा आम दवाओ की कीमत में कितना अंतर है तथा बाबा ने स्काट लेण्ड यूरोप में एक द्वीप खरीदा है जो की १.२५ किलोमीटर एरिया में फैला हुआ है इतना पैसा बाबा ने कहाँ से दिया है क्या यह विदेशी धन का हिस्सा नहीं है ? ( चूँकि कोई भी ट्रस्ट अपने संचित धन को आयकर अधिनियम के अंतर्गत विदेश में खर्च करने या स्थाई संपत्ति खरीदने में व्यव नहीं कर सकता है) जिसको वापस लाने के लिए बाबा ने एक मुहीम छेड़ी हुई है ? आजकल बाबा का एक ही नारा होता है योग के प्रत्येक शिविर में की विदेशो में जमा काला धन वापस लाना है ? तथा भारतीय राजनीती की दशा बदलनी है उसके लिए वह स्वाभिमान ट्रस्ट के द्वारा एक राजनीती पार्टी भी बना रहे हैं ? सबसे पहले तो बाबा को यह बताना चाहिए की वह सरकार को उपदेश देने के साथ टेक्स कितना देतें हैं जहाँ तक मेरी जानकारी है बाबा की कोई सी भी इकाई कोई टेक्स नहीं देती है अगर कोई टेक्स देते है तो उसका विवरण आप को भी पता होना चाहिए तीसरी बात यह कि बाबाजी दावा करते हैं कि कोई भी व्यक्ति योग द्वारा चार सौ वर्ष तक जीवित रह सकता है और वह दावा भी करते हैं कि वह स्वयं भी दो सौ वर्ष तक जीवित रहेंगे मैं उनसे एक प्रशन करना चाहता हूँ ( क्षमा याचना सहित ) वह अपना विकृत चेहरा जो कि दाड़ी द्वारा छुपा रहता उसे ही उस योग द्वारा अभी तक ठीक करने में कामयाब नहीं हए हैं............ जबकि वह भारत ही नहीं पूरी दुनिया को योग द्वारा रोग्मुक्त्त बनाना चाहते हैं अत सबसे वह अपने को भारत का ईमानदार नागरिक साबित करेने का यतन करे भारतीय राजनीति योग गुरु से नहीं सुधरने वाली समय आने पर स्वयं ठीक हो जायगी | जैसा के गीता में स्वयं भगवान् श्री कृषण ने कहा है ..... यदा यदा ही धर्माश्य////////////////////.

के द्वारा:

प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद सोनी जी, बड़ी अच्छी बात कही आप ने \"..ये धन के पुजारी वतन बेच देंगे...\" हिंदुस्तान की राजनीती में जब एक पार्टी का अध्यक्ष, एक आतंकवादी को दूसरी पार्टी का दामाद कहता है तो यह एक बड़ा मुद्दा बन जाता है और सारे मीडिया में छाया रहता है लेकिन आतंकवादियो की सुरक्षा में करोडो रूपये खर्च करने वाली पार्टी यह नहीं समझती की गडकरी जी का दामाद कहना मुद्दा नहीं है. मुद्दा है आतंकवादियो को मेहमान की तरह छुपा के रखना और उनपर देश के करोडो रुपये खर्च करते रहना....लेकिन यही तो एक आम हिन्दुस्तानी और एक वोट बैंक के भूखे राजनीतिज्ञ में फर्क है...कांग्रेस के बड़े बड़े नेता इस मुद्दे पर प्रतिष्ठा और गरिमा की बात कर रहे थे..लेकिन वो नहीं सोच रहे थे की अगर उनकी सरकार ने देश की प्रतिष्ठा और गरिमा के बारे में सोचा होता तो यह दिन ही नहीं आता...

के द्वारा:

अगर आज के सभी नेता हमारे पुराने क्रन्तिकारी नेताओ की तरह सोचने लगे तो इनकी तो दूकान ही बंद हो जाएगी मतलब इन बेचारो का स्विस बैंक अकाउंट तो खाली ही रह जायेगा फिर कैसे ये अपने शौक पुरे करेंगे ! आपने ये लाइने तो सुनी हो होंगी ! जो गलती करे वो इंसान जो गलतिया करे वो शैतान जो बार बार गलतियाँ करे वो पकिस्तान और जो हर बार गलती माफ़ करे वो \"हिन्दुस्तान\" बस इसी तमगे को लगा कर हिन्दुस्तान खुश हुआ जा रहा है ! और अतिथि देवो भवः की निति पर चलते हुए कसाब जैसो को हिन्दुस्तान के दामाद की तरह पूज रहा है ! मेरे एक ब्लॉग पर किसी ने कुछ बहुत अच्छी लाइने लिखी थी ! वो लिख रही हूँ ! कलि बेच देंगे, चमन बेच देंगे धरा बेच देंगे, गगन बेच देंगे कलम के पुजारी अगर सो गए तो, ये धन के पुजारी वतन बेच देंगे ! बस हमें तो अपनी कलम जारी रखनी है कहीं तो ये अपना असर दिखाएगी !

के द्वारा:

१००% सही बात कही निखिल जी. हमारे देश की विदेशनीति सरकार बदलने के साथ ही बदल जाती है. किसी ने कहा है की "चिर शांति के लिए कभी कभी युद्ध अपरिहार्य हो जाते है"..हम यह नहीं कह रहे है की आप आज ही दुश्मन देश पर आक्रमण कर दो लेकिन कम कम इतना सन्देश सरहद पर भेजो की "अब हद हो गई है और अब और नहीं", और यह सिर्फ भाषण में नहीं बल्कि ज़मीन पर दिखाना चाहिए. एक तरफ अमेरिका है जिसकी विदेश नीति के हिसाब से एक आतंकी हमले के बाद वह हजारो मील दूर अफगानिस्तान में आतंकियों के सफाए के लिये आ गया है और हम उसी अमेरिका के ही दबाव में सरहद से मात्र ४० - ५० मील दूर आतंकी सिविरो के फोटो तो खीचते है लेकिन कोई करवाई नहीं करते...है न विचलित करने वाली बात...

के द्वारा:

मित्रों अत्‍यंत दुर्लभ संयोग था कि इसी वर्ष बैसाखी के दिन मैं अपने कार्यस्‍थल के चार साथियों के साथ जलियॉंवाला बाग की पवित्र भूमि के प्रथम दर्शन कर सका। उस दिन एक तम्‍बू लगे हुए मैंने वहॉं देखा। पता करने पर ज्ञात हुआ कि सरकारी आयोजन था, क्‍यों कि उस रोज भी बैसाखी थी, जिस दिन भारतीय स्‍वतंत्रता संग्राम के इतिहास का परम जघन्‍य काण्‍ड हुआ था। मित्रों वैसे तो भारतीय होने के नाते अनेक कमियॉं नजर आईं, किन्‍तु फिर भी उस रोज दो-तीन बड़ी कमियों के बारे में जिक्र करना अपना कर्तव्‍य समझता हूँ- 1. शिलालेखों की सफाई किया जाना और सफाई कराया जाना (दोनों ही काम) जरूरी नहीं समझे गए। (मैं सबूत के तौर पर उसी दिन खींचे हुए फोटो भी पेश कर सकता हूँ, यदि कोई सरकारी नुमाइंदा मांगे तो)। 2. अमर ज्‍योति पर एक तेल कम्‍पनी का लोगो बना है और नाम लिखा है, जैसे आम तौर पर मंदिरों में लिखा होता है ना कि यह पंखा मिo एक्‍स ने दान में दिया है वैसे ही। उक्‍त तेल कम्‍पनी से जानना चाहता हूँ, क्‍या शहीद स्‍मारक तुम्‍हारे बाप का है, जहॉं तुमने अपना लोगो लगा दिया? उक्‍त शहीदों को सम्‍मान नहीं दे सकते तो उनकी आत्‍माओं को इस तरह सताओ तो मत...। क्‍यों ऐहसान जता रहे हो उन शहीदों पर और उस पवित्र भूमि पर तुम? 3. शिलालेखों से भारत देश की राजभाषा अनुपस्थित हो तो इसे देश का दुर्भाग्‍य कहूँ या राजभाषा का ?

के द्वारा:

सभी देशप्रेमी सज्‍जनों को प्रणाम के अतिरिक्‍त मुझे यह कहना है कि- एक कहावत है- 'बच्‍चे के हाथ में कभी तलवार नहीं देनी चाहिए' । अफसोस! हमारे बड़ों ने हम नादान बच्‍चों के हाथ में आजादी नाम की तलवार दे दी है। काश उन्‍होंने यह तलवार हमारे हाथ में देने से पहले थोड़ा इंतजार कर लिया होता हमारे जवान हो जाने का। हम आजाद तो हो गए, पर मन से आजादी को अंगीकार करने में हम पीछे रह गए। शायद इतनी आसानी से आजादी मिल जाएगी ये हमारे अमर शहीदों ने भी नहीं सोचा होगा वरना तो वे पहले हम अपात्र लोगों को आजादी का वरदान कभी न देते। जिस आजादी की हम रक्षा नहीं कर पा रहे हैं निश्‍चय ही हम उस आजादी के पात्र नहीं थे। जिन अमर शहीदों की हम आज बातें करते हैं उन्‍हें जो सम्‍मान मिलना चाहिए था, हम उन्‍हें नहीं दे रहे हैं। यह धरती मां अनेक लाल उपजने वाली मां थी, फिर इस मां की कोख से हम जैसे गद्दार क्‍यूं पैदा हो गए कि जो शहीद ऊधम सिंह व अन्‍य शहीदों के नामों को इज्‍जत से नहीं लेते बल्कि कमीने और इस देश की इज्‍जत को रौंदने वाले फिरंगी डाकुओं के नामों को इज्‍जत देते हैं। मेरा इशारा सीधा सीधा 'जलियॉं वाले बाग' स्थित चित्रों के समक्ष लिखी हुई इबारत से है। जहॉं शहीद ऊधम सिंह जी या अन्‍य शहीदों का जहॉं भी जिक्र हुआ है, उनके बारे में 'उसने'/'था'/'वह' की भाषा में बताया गया है, जबकि कमीने अंग्रेजों के बारे में जहॉं भी जिक्र हुआ है, हर जगह 'उन्‍होंने'/'थे'/'वे' की भाषा प्रयोग की गई है। क्‍या हम और हमारे देश की सरकार सो रही है? निश्‍चय ही हम इस आजादी के लायक नहीं हैं, हम तो शायद गुलाम ही रहते तो ही बेहतर था क्‍योंकि ये आजादी का खजाना जब से हमें मिला है, हम पगला गए हैं, कभी पाकिस्‍तान बनाते हैं, कभी बांग्‍लादेश, कभी राष्‍ट्रपिता को गोली मारते हैं तो कभी हिंदू-मुस्लिमों को मारते हैं। कभी बब्‍बर खालसा तो कभी कश्‍मीरी आतंकवाद, कभी नक्‍सलवाद तो कभी लिट्टे। धिक्‍कार है... हम कहते हैं कि भारत भूमि पवित्र भूमि है, यहॉं अनेक बार ईश्‍वर ने अवतार लिये हैं, आचार्य रजनीश का कहना था कि जिस घर में बार-बार डॉक्‍टर को आना पड़ता हो वह घर स्‍वस्‍थ नहीं हो सकता । मैं इस विचार से 100 प्रतिशत सहमत हूँ।

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के द्वारा:

जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया जो आपने इन सब समस्याओं को यहाँ पर उल्लेख किया. हाँ इसमें कोई शक नहीं है की मुस्लिम आज के वक़्त पर नीचले स्तर पर जी रहे हैं. और ऐसा नहीं की मुस्लिम लोगों को मालूम नहीं. आज मुस्लिम लोगों को ज़रुरत है तो शिक्षा की. जिससे लोग खुद को उपर उठा सकें. लेकिन उसके लिए भी उचित आमदनी होनी चाहिए. और रही बात नौकरी की तो बात बहुत ही दूर है. क्यूंकि आंकड़ों की हिसाब से भी देखा जाये तो मुस्लिम की भागीदारी सरकारी नौकरीओं में 1 % से भी कम है. क्या वजह है? चलो मान लिया की सरकार ने कभी कभी आरक्षण दिया लेकिन इसका लाभ कोई उठा सके इससे पहले ही हो हल्ला लोग और दूसरी पार्टियाँ करना चालू कर देती हैं. वहां उस वक़्त लोग और दूसरी पार्टियाँ खास कर भाजपा यह नही देखती की यह कदम क्यूँ उठाया जा रहा है. और यह भी नहीं देखते की इससे से समाज में बराबरी होगी. मान लें एक पिता के चार बच्चे हैं. उनमें से एक बीमार है. अगर पिता उस बीमार बच्चे पर दुसरे बच्चों से ज्यादा खर्च करता है तो इसमें बुरा क्या है. आखिर सब भाई भाई ही तो हैं. लोग यह क्यूँ नहीं समझते हैं. पता नहीं. मैं यह सिर्फ मुस्लिम समाज के लिए ही नहीं बल्कि जितने भी ऐसे समुदाय हैं उनको ऊपर उठाने के लिए कुछ न कुछ तो करना चाहिए. और इसमें हमें भी मदद करनी चाहिए ना की आलोचना करने के लिए सिर्फ आलोचना करना. आज भी आप मुस्लिम इलाकों का दौरा करें तो आपको मालूम चलेगा के स्कूल कम हैं और पुलिस थाने ज्यादा. वहां बहुत मुश्किल से आपको सरकारी स्कूल और कॉलेज देखने को मिलेंगे. आखिर क्यूँ? मुस्लिम इलाकों में बैंक सरकारी ऑफिस वगैरह जल्दी नहीं बनाई जाती है. भले ही वह जगह आसपास के जगहों से थोड़ी विकसित तब भी. हाँ कुछ जगह पर हैं. अगर आपको मेरी बार पर यकीन नहीं तो आप किसी गाँव में जाकर देख लें. हाँ हम सभी जानते हैं की अकबर का शासनकाल एक स्वर्णयुग था. क्यूंकि सब को barabari का siddhant था. आज अगर padhai में सरकार ने मदद करना chaha तो वहां भी लोगों और partiyon ने hangama machana चालू कर दिया. क्यूँ? आखिर क्यूँ? अगर लोग shikshit rahenge padhe likhe rahenge तो duniya में kahin भी काम khoj sakte हैं. उस से bharat तो majboot ही hoga. मैं dharmik sthalon की taraf kahna chahoonga. जो भी hua वह duniya और हम जानते है की वह बुरा hua ya achcha. वहां किसी एक aadmi ने नहीं toda. hazaron लोगों ने is kaam को किया है. लेकिन वह लोग kis समाज से aate हैं. क्या वह hamare saath rahne wale समाज में नहीं aate. phir unhone ऐसा क्यूँ किया. hamare bagal wale लोग वहां gaye और tod कर wapas hamare paas ही aaker rah रहे हैं. क्या वह ab ऐसा samman dete हैं. मैं poochchhta hoon ऐसे kitne लोग हैं जो वहां jaate हैं?. बल्कि यह kahna chahoonga की लोग उस ghatna को beetne के baad तो वहां और jaane की raraf dhyan भी नहीं है. लेकिन phir भी कुछ dal और लोग नहीं समझते हैं. वह barbar ram mandir का mudda uthate हैं. jabki बात beet chuki है. jabki kitne baras हो chuke हैं. अगर हम इन baaton को chhor कर janta के bhalai के लिए कुछ kaam करें और लोगों को करने den तो yehi achha है pure desh की taraqqi के लिए. मैं किसी को alag नहीं manta किसी से. हाँ bhed bhav mitakar chalne और rahne की taraf hoon. jismein hamara और hamare desh की taraqqi हो khushhali हो और कुछ नहीं.

के द्वारा:

अरुणेश जी आपकी हर पोस्ट की तरह ..ye भी सोचने के लिए मजबूर करने वाली पोस्ट है ... भारतीय निति नियंता शुरू से ही पिछलग्गू रहने के आदि रहे है और यह हमारे तंत्र में अन्दर तक बैठ चुकी सच्चाई है .हमने कसब को फासी की सजा सुना दी ..और सर्कार ने मन लिया की मुम्बई हमलो की कार्यवाही और बदला इन्साफ सब हो गया ... लोग भी कुछ दिनों में भूल जायेंगे... हमने पकिस्तान को अबतक ये नहीं समझाया की असली अपराधी वही है ...हमारा ऐसा अंदाज अबतक नहीं दिखा.... हर हमले हर घटना के बाद विश्व दिरादारी की तरफ लचर और दयनीय रूप से मुह उठा कर देखना हमारी नियति बन चुकी है मानो अमेरिका ब्रिटेन , रूस की बैसाखी के बिना हम कोई निर्णय ही नहीं कर सकते... यही वजह है की हम बार बार गाल आगे बढ़ाते है और पाकिस्तान बार बार हमारे मुह पर तमाचे जड़ देता है ..... गाँधी जी ने अहिंसा सिखाई थी नपुंसकता नहीं और राष्ट्र की सुरक्षा की कीमत पर ऐसी निति को वह भी नपुंसकता ही ठहराते .... आज तक भारत एक संप्रभु राष्ट्र नहीं बन सका .... ये वजह है की हमारी सुरक्षा बार बार खतरे में पड़ती है ................

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

hai arunesh ji suprabhatam apane likha ki muslim samaj ya vote bank mere vichar se muslim bhaiyo ke pichadepan ke kai karan hai- 1.shiksha ka abhaw-padhane ke liye kewal madarso ka chayan-hindi mideume ya english schoolo se dur rahana, jisase anya samaj ko karib se dekhane ka mauka nahi milata or kewal apane samaj tak simit rahana. duniya dekhe bina use samajhana asan nahi hai, kyoki yah dekhane me kuch or samajhane kuch or karane me kuch hai. ISALIYE MERE VICHARO SE PURI DUNIYA KO DEKHANE KE LIYE PAHALE APANE SHAHAR KO KHOOLI AKHO SE DEKHANA CHAHIYE OR USAKE LIYE SABHI KE BICH JANA PADEGA. 2. sikcha se jyada kam ko mahataw dena-bachapan se hi pustaini kam me bachcho ko laga dena jisase kuch naya karane ki ichcha shakti ka khatma ho jana, jisase nai soch ka abhaw. 3.voting - varanasi me is bar M.P. ke selection me sthaniya musalim kome ne kewal jat ke adhar par vote kiya yah satya hai. yadi muslim samaj kam ke adhar par vote dena prarambh kar de to is samaj ko bahut labh ho, mr. rajesh mishra ex.m.p. ne apane pure karyakal me jitana kewal is samuday ke liye kiya meri jankari me itana vigat varsho se kisi m.p. ne nahi kiya kewal is lalach me ki is samudai ka vote ek tarafa hota hai, yah dhik bhi hai voting to ek tarafa hi hui lekin unake against, yadi mishra ji ko yah samaj kam ke liye vote karate to sayad aane wala m.p. bhi kuch sochata. jo m.p. rajesh ji ke karyakal ka ankalan karega wah kyo is samaj ke liye work karega. IS LIYE MERI RAI HAI KI IS SAMAJ KO KAM KARANE WALE M.P. /M.L.A. KO VOTE KARANA CHAHIYE WAH CHAHE JIS PARTY YA KOAM KA HO, USASE IS SAMAJ KE PRATI ANE WALE HAR M.P./M.LA. KA JHOKAW HOGA , JO IS SAMAJ KE PHAYADE KA HOGA. likhane ke liye bahut kuch hai lekin sikcha or rajanit ke liye itana hi bahut hai.

के द्वारा:

ऐसे ज्वलनशील विषय को बहुत संभाल कर लिखने के लिये अरूनेश जी बधाई । पाठकों द्वारा की गई चर्चा भी बड़ी रोचक है । मुस्लिम भाईयों के पिछड़ेपन का एक बहुत बड़ा कारण अशिक्षा है जिसकी वजह से कभी उन्हें मौलवी बरगलाते हैं तो कभी मौलाना मुलायम जैसे दूसरे नेता । इनको सिर्फ एक वोट बैंक बना कर रखा गया है जैसे पिछड़ी जातियों को आरक्षण का झुनझुना पकड़ाया गया है । अभी किसी भाई ने कहा कि भारत में लोकतंत्र है कहां ? सच कहा । यह सिर्फ एक नाटक हो रहा है । लोकतंत्र के चारों खंभे ढह चुके हैं । गौर से देखिये । विधायिका का हाल आप  संसद के प्रश्नकाल की बहस देख कर लगा सकते हैं । कार्यपालिका विधायका के पैर की जूती है । कई करोड़ वाद आज देश भर के न्यायालयों में लंबित पड़े हैं । और मीडिया आज टीआरपी और विज्ञापन के लिये मरा जा रहा है । न्यूज चैनल सिर्फ शनिदेव, भूत प्रेत, आईपीएल, सानिया मिर्जा का निकाह इन्हीं सब में फंसा हुआ है । चारों खंभे तो ढह रहे हैं । भ्रष्टाचार के बिना हम रह नहीं सकते क्योंकि काम तो सब को पड़ता है । हम सब एक ऐसी नाव में बैठे हैं जो बड़ी तेजी से एक गहरे जलप्रपात की तरफ बढ़ रही है । बचने के क्या रास्ते हैं कृपया करके कोई मुझे बताये ।

के द्वारा: kmmishra kmmishra

कबीर जी,अभिवादन, आपने क्या खूब कहा की हम उस देश के निवासी है जहाँ अहिंसा ही परमो धर्मं रहा है !, मुझे लगता है की ये गाँधी जी का दिया हुआ वो श्राप है जो वो अपने कायर नेता सहयोगियों को दे गए थे,अहिंषा का पाठ उसे पढाया जाता है,जो हिंषा करता हो जिस देश के लोग सैकड़ो सालो से विदेशी आक्रंताओ की मार खा खा कर कायर हो गए हो उसे आहिंषा का पाठ पढ़ाना उस देश के लोगो के आत्म सम्मान को जूते के तले रौंदने के बराबर है,जो हमेशा हिन्दुओ के साथ हुआ और हो रहा है,गांधी जी की इस सीख का तोहफा मुसलमानों ने उनके जिन्दा रहते ही अपनी महत्वकांझा पाकिस्तान को बनाने में लाखो हिन्दुओ की लाशो के रूप में दिया था, ये सीख कायरता का दूसरा नाम है,और हिन्दुओ पर कलंक क्यों की औसत हिन्दू आज भी कायर है, परिस्थितियों में सुधार आया है,लेकिन धीमा इसकी रफ़्तार पकड़ना जरुरी है,क्यों की एक कायर और जन्मजात हिंषक में बराबरी कभी नहीं हो सकती !! jaari

के द्वारा:

तुफैल जी आदाब ,सुन्दर बात लिखी आपने की जो कल हुआ था वह लोकतान्त्रिक प्रणाली नहीं थी, लेकिन आज एक लोकतान्त्रिक प्रणाली में ऐसा हो रहा है , ये बिलकुल सच है की उस समय जब मुस्लिम आक्रमणकारी पुरे विश्व को लूट रहे थे अनगिनत चर्च ,और मंदिरों को सिर्फ लूट ही नहीं रहे थे उन्हें जमीदोज कर के वहां मस्जिद का निर्माण भी कर रहे थे अनगिनित निरअपराध मासूम लोगो की निर्ममता से हत्या कर रहे थे ,माताओ बहनों को अपनी हवस का शिकार बना रहे थे ,बाकी बचे हुए लोगो को इस्लाम कबूल करा रहे थे ,और ये सब आपकी पवित्र कुरआन की रौशनी में हो रहा था ,उस समय भी लोकतंत्र कही नहीं था ,लेकिन आज लोकतंत्र है ,किताबो में ही सही ,लेकिन है ! अब आज के विश्व को देखिये , आज इसाई आक्रमणकारी (अमेरिका इंग्लैंड) मुस्लिम धरती को सिर्फ लूट (तेल) ही नहीं रहे है अनगिनित मस्जिदों को जमीदोज भी कर रहे है ,अनगिनित निरअपराध मासूम लोगो की निर्ममता से हत्या भी कर रहे है, मुस्लिम माताओ बहनों को अपनी हवस का शिकार भी बना रहे है, और इसाई भी बना रहे है ,९/११ की घटना के बाद से २००९ तक ,अल जजीरा के मुताबिक लगभग १२ लाख निरपराध मासूम मुसलमान मारा जा चूका है , कीमत चुकानी पड़ती है तुफैल जी देर से ही सही लेकिन चुकानी पड़ रही है , बिगुल बज चूका है अब आप लोगो को कब सुनाई देगा ये नहीं पता ! जारी....

के द्वारा:

तुफैल जी नमश्कार ,,,पहली बार मुझे आपका कमेन्ट सही नहीं लगा ....जहा तक भारत की बात है भारत में न तो तंत्र लोकतान्त्रिक है न लोक ही लोकतान्त्रिक है .ये लोकतंत्र अभी केवल किताबो में पड़ा हुआ सुनहरा ख्वाब है जिसे ६३ साल पहले जनता को दिखाया गया था ...और लोकतान्त्रिक प्रणाली का मतलब ये नहीं है की देश के ह्रदय पर की गई चोट को आप भूल जाये... आप को ये पता होगा की देश के हर कोने में कितने मंदिरों को इस्लामिक शाशन में गिराया जा चूका है . खैर ये इतिहास की बात है इसमें कोई सुधार नहीं हो सकता ... दुखद ये है की आज भी सरकार लोकत्रांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष वातावरण का हवाला देकर निरंतर हिन्दू मान्यताओ को ठेस पहुचती है और कभी अभिव्यक्ति की आजादी तो कभी अल्पसंख्यक के नाम पर तुष्टिकरण का घटिया खेल खेलती है और इस सबके पीछे केवल यही मनोवृत्ति है की मुस्लिम वोट बैंक ......पर कब्ज़ा....और इस बात से आप इनकार नहीं कर सकते की आम मुस्लिम मतदाता इस राजनीती का शिकार है और एक गुमराह मोहरा बना हुआ है . हमें दुःख होता है ..जब डेनमार्क में बने एक कार्टून पर (जिसे हम कभी उचित नहीं मानते क्योकि वह किसी आस्था के मानबिंदु पर प्रहार है ) भारत के प्रधानमंत्री ने संसद में बात उठाई और कांग्रेस के नेताओ ने प्रेस कांफ्रेंस कर के इसकी आलोचना की जबकि ये घटना डेनमार्क में हुई थी....खैर उन्होंने ठीक किया कोई शिकायत नहीं पर जब मलेशिया में सैकड़ो हिन्दू मंदिर उसी समय में तोड़े जा रहे थे तो सरकार का कही भी एक भी आलोचनात्मक कठोर रुख नहीं दिखा ... इसे क्या कहेंगे? ये कौन सा लोकतंत्र है ये तो केवल तुष्टिकरण की घटिया नीति है. जैसे हर मुसलमान के लिए मक्का और दिल्ली की जमा मस्जिद है वैसे ही हम हिन्दुओ के लिए राम और अयोध्या है .. तो क्या धार्मिक और सामाजिक सहयोग को दिखाते हुए अयोध्या में राम मंदिर के लिए मुसलमान भाइयो को सहयोग नहीं करना चाहिए... तुफैल भाई यकीं मानिये जिस दिन अयोध्या में राम मंदिर मुसलमानों के सहयोग से बन गया उस दिन भारत के इतिहास में एक बहुत बड़ा परिवर्तन होगा क्योकि ये मुद्दा हमेशा आम हिन्दू और मुसलमान को छूता है. और बात अधिकार की नहीं है ये इतिहास गवाह है और अबतो पुरातत्व विभाग भी पुष्टि कर ह्चुका है इस बात की की वहा भव्य राम मंदिर था ..औरंगजेब , फिरोज्तुग्लग ,जहाँगीर और जाने कितने मुस्लिम शःसको ने भारत में हिन्दू मानबिन्दुओ को किस बुरी तरह रौंदा केवल अपनी धार्मिक उन्माद में आकर ये सभी जानते है ..और बात तो केवल अयोध्या की है. क्योकि वह स्थान वैसे ही है जैसे हजरत मुहम्मद साहब का मक्का ... एम्.ऍफ़. हुसैन जैसे मानसिक रूप से निम्न लोगो की आलोचना कोई मुसलमान सामने आकर क्यों नहीं करता क्यों कोई हिन्दू मुस्लिम मान बिन्दुओ का ऐसा विकृत निरूपण नहीं करता जैसा हुसैन और उसके जैसे दुश्चरित्र लोग करते है.अगर अरुणेश जी की वास्तविक मंशा राम मंदिर है तो मै उन्हें बधाई देता हु वे परदे में छुपे धर्मनिरपेक्षतावादी नहीं है . और ऐसी धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र किस काम का जो दोहरा चरित्र धारण किये हुए हो.... अयोध्या का समाधान राम मंदिर ही है बस उसके लिए मुसलमान भाइयो का सहयोग होना चाहिए.. नहीं तो निर्माण अधुरा होगा अगर ये क़ुरबानी है तो ये कुर्बानी मुसलमान भाइयो को करदेनी चाहिए क्योकि वह करोणों हिन्दुओ की आस्था का सवाल है. ..अयोध्या भारत के हिन्दुओ की प्राचीन सामाजिक सांस्कृतिक आस्था और सामाजिक ढाचे का प्रतीक है. अरुणेश जी ने बात को थोडा घुमा के रखा है उन्हें यह बात सीधे रखनी चाहिए थी मगर उनका उद्देश्य यही रहा होगा की कही किसी मुस्लिम भाई को ठेस न लगे ...पर मै उन्हें बधाई देना चाहता हु की वे करोणों हिन्दुओ की भावना को रखने की हिम्मत तो रखते है.. वरना मुह चुराकर बोलने वाले तथाकथित धर्मनिरपेक्ष लोगो विशेषकर हिन्दुओ ने ही सबसे ज्यादा राजनीतिकरण किया है हिन्दू-मुस्लिम संबंधो का ...और इस लेख पर विचार करे तुफैल जी अगर मुस्लिम समाज के अन्दर से जागरूक लोगो ने बहार आकर पुरे मुस्लिम समाज में जागरूकता फ़ैलाने शिक्षा के अधिकारों के प्रति जागरूकता फ़ैलाने का काम नहीं किया तो ये वोट बैंक की ही तरह हर राजनितिक दल के दलदल में फसे रहेंगे ......

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

मिश्रा जी अभिवादन, एक कहावत सुनी है- 'गुड गोबर करना'. आपने भी यही किया है. आप ही की बात- "मेरे विचार से “राम मंदिर” को जिस तरह से मुस्लिम अस्मिकता से जोड़ा गया है वह सरासर गलत है. आज अगर “अमेरिका” या “इज़राइल” “मक्का मदीना” पर आक्रमण कर के वह पर गिरिजाघर या कुछ और बनवा दे तो किसी भी मुस्लिम भाई की तरह मै भी इस बात का विरोध करूंगा. उसी तरह अगर किसी शासक ने हिन्दुओ के “भगवन राम” का मंदिर गिरा कर वहां पर मस्जिद बनाई है तो मै उम्मीद करता हूँ कि आम मुस्लमान भाई इस बात को समझेगे कि ये गलत है." समाज और मुस्लिमों के हित की बात के पीछे आप ने अपनी वास्तविक मंशा लेख के अंत में जाहीर की. क्यों भूल रहे है की जो कल हुआ था वह लोकतान्त्रिक प्रणाली नहीं थी, लेकिन आज एक लोकतान्त्रिक प्रणाली में ऐसा हो रहा है? लोकतान्त्रिक प्रणाली में बाबरी ढांचा ढहा कर आपने क्या सिद्ध किया ? आज उस स्थल से हिन्दू-मुस्लिम दोनों वंचित है तो किसका नुकसान हो रहा है ? निश्चित ही जिस दिन धर्म विशेष का दृष्टिकोण रखने वाली कोई एक पक्षीय सरकार केंद्र में आ जाएगी, उस दिन उस स्थल पर आप ही का अधिकार होगा. धन्यवाद.

के द्वारा:

u picked very good subject, but it appears u went out of track or there was some hitch with u to reveal the truth. Now a days we see A GOOD NUMBER OF muslim youth have been misguided in the name of dharama, therefore they are wasting thier energy in the so called jihad and thats why terrorisam is spreding in INDIA like mushrooms, our Govt, has no will power to check it, not only this making so many things for their vote bank.Sacchhar committee, Rangnath mishra reports are nothing but to spread communilisam in India and wanted to split this country again. Our Govt, has no will or dedication to curve the terrorist activity in india , because no such terrorist hanged in this country for their henious crime, and mankind as ashamed because of our coward acts in this country. For all such slackness we common people are also responsible we elect such GOVT. IN DELHI AFTER MUMBAI BOMB BLASTS WHOSE PARTY'S GOVT, RULING IN THE CENTRAL COULD NOT SAVE INDIANS IN MUMBAI, our leadership was pronouncing loudly that they will not hold any talks with Pakistan untill and unless transparent action is viewed against the culprits of mumbai bomb blast, but what happened to our leadership who vowed before pakistan. We think our war would be fough by the America and that's why we live in fool's paradise THIS IS THAT AMERICA WHO GIVES BULK OF FINANCIAL AND ARMS AMMUNATIONS HELP TO OUR ENEMY COUNTRY AND SAY US TO REMAIN COOL AND CALM AND KEEP CONTINUE DIOLOGUES WITH THEM WHICH HAS NO FRUITFUL RESULT. WHY WE ARE SO BRAVE AS TEL AWIB GOVT WHO IS SURROUNDED BY NUMBERS OF ENEMIES BUT IS SURVIVING LIKE A TRUE WARRIOR JAININD , VANDE MATRAM

के द्वारा: shantiswaroop48 shantiswaroop48

MISHRA JI MAI APKE VPCHARO SE SAT PRATISAT SAHAMAT HU AUR MANTA HU KI ISKE ALAWA AUR KOI CHARA NAHI.AJ TAK IN LOGO KE SATH JO ANYAY AUR UPEKCHA HAMARE VYAVASTHA DWARA HUA HAI ISKA PARIMARJAN BHI HONA CHAHIYE AUR SATH HI SATH ISTARAH KI VYAVSTHA BHI HONI CHAHIYEKI BHAVISHYA ME FIR KOI SHOSAD YA ANYAY IN NIREEH ADIVASIO KE SATH NA HONW PAYE.YAH TABHI HOGA JAB HUM IS TARAH SOCHANA SURU KAREGE AB TO GED SARKAR KE PALEME HAI, HA YAH JARUR DHYANME RAKHANA CHAHIYE KI BALPRAYOG SE KISI SAMASYAKASAMADHAN KABHI NAHI NIKALA HAI BAT CHAHE PURVATTAR KI HO YA ASAM YA KASHMIR KI AGER BAL PRAYOG HOGO TO USKI PRATIKRIYA ME HINSA AUR BADH JAYEGI JO KISI KE HAQ ME NAHI HAI.nAXSALVADI KOI GAJAR,MULI NAHI HAI JAISA HAMARE KALAMBEER JO BARSATI MADHAK KI TARAH BAGAR KUCH SOCHE SANJHE GOLI KI BAT KER KE MAMLE KO AUR PECHIDA BANANE KA KAM KER RAHE HAI. HAME NAHI BHULNA CHAHIE KI SURACHA BAL BHI UNHI GARIBO SE HI CHUN KER ATE HAI AUR MAJBURI ME HI APNE HU DESH KE NAGRIKP PER NUOKARI KI MAJBORI ME HI JAN JOKHIM ME DALTE HAI. AKHIR SARKAR KHANI COMPANIO KI DALALI KYO KARNE LAGATI HAI AUR JO HAJARO KAROD KA MUNAFA KAMA KER LE JATE HAI UNASE JINAKI JAGAH,JAMIN AUR ROJGAR JA RAHA HAI WE LOG IN ADIVASIO KE VISTHAPAN KA MUAWAJA DE AUR VISTHAPIT LOGO KE RAJGAR KI VYAVASTHA KARE.aKHIR KYO VEDANTA,TATA ,BILDA AUR MITTAL ITANE PAVITRA HO JATE HAI KI NIRIH ADIVASIO KO MAR BHAGANE ME INLOGO KO KOI PASCHTAP BHI NAHI HOTA. MER TO NISCHIT VICHAR HAI KI OPRATION GREEN HUNT GAIRKANUNI HAI AKHIR KYO HAMARE GRIHMANTRILOK SABHA ME NAHI SWIKARTE KI KOI GREEN HUNT CHALAYA JA RAHA HAI.NIACHIT HI KUCH AISA HAI JISE CHUPAYA JA RAHA HAI.

के द्वारा:

. मै मंजुला जी से सहमत हु , ये गहरा अविश्वास जो हिन्दू और मुसलमानों के बीच है उसका फ़ायदा ये मुल्ले , नेता और सरकार कर रहे है ..हिन्दुओ के मन में मुसलमानों के प्रति भय और मुसलमानों में हिन्दुओ के प्रति भय बनाये रख कर वे केवल अपना हित साधते है .. आज भी सरकारे केवल इस टाक में रहती है की कैसे मुसलमानों का तुष्टिकरण करके वोट बैंक बढाया जाए... जबतक मुस्लिम समुदाय खुद जागरूक नही होगा उसकी स्थिति नहीं सुधरेगी .. उन्हें समझना होगा की देश का आम हिन्दू उतना ही परेशान है जितने आम मुसलमान ..वे एक काल्पनिक भय में जी रहे है जिसका सबसे बड़ा कारन मुस्लिम वर्ग में अशिक्षा है ..उनके धर्म गुरु खुद ही उन्हें जागरूक करने का प्रयास नहीं करते ..ये ही सब कारन है की मुस्लिम वर्ग केवल वोट बैंक के रूप में ही प्रयोग किया जाता रहा है ..और आगे भी यही होता रहेगा अगर वे जागरूक नहीं हुए तो...

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

आज के मुसलमानों की सच्ची तस्वीर पेश करता है आपका ये लेख, गन्दी राजनीति और मुसलमानों में व्याप्त गहरा अविश्वास उन्हें पीछे धकेल रहा है,थोथे आश्वासनों की पट्टी ने उन्हें समाज की मूल धारा से कभी जोड़ा ही नहीं,जिसका खामियाजा आज पुरे समुदाय को भुगतना पड़ रहा है,आज वो धर्म के प्रति जितना जागरूक दिखते है उतना जागरूक वो और किसी भी समस्या के लिए नहीं है ! जिस तरह से आज हिन्दुस्तान की पुरानी समस्याओ के लिए कांग्रेस की ठोस निर्णय न लेने की कायरता रही है ठीक उसी तरह से मुसलमानों के इस बुरे हालात के लिए सिर्फ नेता और उलेमा ही नहीं खुद मुसलमान जिम्मेदार है,क्यों की वो उतने भी नादान नहीं है की वो अपना बुरा भला न समझ पायें ! आपने सच्ची तस्वीर पेश की है आज के मुसलमानों की लेकिन इस लेख से कोई जागरूकता आ सकेगी इसके लिए मै ज्यादा आशा वान नहीं हूँ

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अरुणेश जी, जिस दिन मैंने रामदेव जी का उपहास उड़ाने वाला ब्लॉग पड़ा तभी से जवाब को आतुर था.किन्तु नेट प्रोब्लेम व हिंदी में लिखने की प्रवाह में लिख नहीं सका, उस लेख को लिखने और सहमत होने वाले दोनों मूर्खों को जवाब की चाहत आपने सटीक शब्दों में पूरी की,बहुत-२ धन्यवाद. अपने मन में बेहद खुश उस लेखक की पूरी मानसिकता समाज आती है ऐसे ही लोग देश को बर्बाद करने लगे है.में ३ बार हरिद्वार शिविर कर आया हूँ भारत स्वाभिमान का विशिष्ट सदस्य व योग शिक्छक हूँ. अब तक २५० लोग जुड़ चुके है. हिंदी के ATM Golu font में सचिन के बजाये रामदेव जी को भारत रत्न मिले इस पर लेख भी लिखे है.जो jpg image में है.(शिब्बू आर्य-मथुरा)

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arunesh ji itana sargarbhit lekh likhne ke liye badhai.apne samasya ki jad per prahar kiya hai apka vishleshad 100% sahi hai Agar ham samasya se nipatana chahte hai to abse pahale samsya ki vajah ko samajhana hoga.Ek udaharad mai aj ke samacha rapat ke madhyam se duga pahala to yah ki kisi angreji akhbar me Congress ke maha sachiv aur sayact madhya oradesh ke mukhya mantri rahe Digvijai singh ka chapa aur usame thik wahi bate likhi hai jo apne likha hai unaka to yaha tak kahana hai ki chidubarum ji adiyaj adami hai aur unho ne to yah bhi likha hai ki mai khud isaka bhuct bhogi raha hu.,unho ne bhi kahahai naxsalvadio ki samsya kanun vyavtha ki samasya nahi hai vsatav me yah adivasio ke shoshd se sambandhit hai aur isaka samadhasn bhi adivasio ki samasyao ka samadhan ker ke nika jana chahiyeJo bat digvijai ji apni majborio ke chaltr nahi kah payr wah yah hai ki chiduberum ji carporate vakil hai aur Paryavarad vinas ke liye puri dunia me kukhyat Vedanta ke bord of director rahe hai vaha se mantri banab\\ne ke liye hi hate hai unaki dalali me sakado bekasur surakcha balo ki bali dene per uiaru hai Naxslvad ki samsya to 3daskak se hai lekin ekaek inake grih mantri hote hi videshi atankvadio se adhik khatarnak ho gayi.Dusari bat yah bhi khabar chapi hai ki sarkar jin adivasio ki jamin ja rahi hai nlogo ko 26% hisedari muft me dijayegi.agar yahi kam pahale ker diye hote to na to itana khum\\n kharaba hota aur nahi in khaye,piye aghaye logo ko apni vilasita ko chad ker is tarah desh ke bare me chinta karane ki jahamat utttttthani padati ki apke lekh ko padhe aur itani sargarbhu\\it pratikriya likhane ka kasht uthana padata.IN gali galuoj ki bhasha me bat karane walo ko shyed yah galatfahmi hai ki visfot hoga aur ap aur hamare jaise soch rakhne wale logo ko janta chodegi nahi ye log amiri kr tapu se neeche utare to inhe malum hi jayega ki janta kisake sath hai vasfot me kisaki kya durgati hagi.Agar in jaise soch rakhne walelogo ko agar khanij ke liye bagar maaa\\uawaja aur visthaoan ki vyavsta kiye mar ker khadrdati sarkar to ye maovadio se bade criminal ho jate khar ap jaise soch rakhane wale logo ki hi jarurat hai is visham paristio me thande aur samvedan sheelta ke sath vichar ker ke radneet banane ki jarurat hai kyo ki agar ladai lambi jgichati hai ti nukasan dono taraf hoga khun dono ka bagega ye log to jawano ke shahid hone ke bad mombatti jala ker sok ,ana ker fir apne dhandhe melag jayege.aur inake rol modal chidumerum ji stifa de ker apna vasvik karya me lag jayege yani carporate vakalat aur Vedantame to jagah hamesha ke liye surachit kara hi chke hai 76 jawano ki kurnbani de ker.isi tarah apne vicharo ko abhivyact karte rahiye ek bar fir se badhai.i

के द्वारा:

आज के इस भौतिकता वादी युग में जहाँ कुछ डाक्टर आम इंसानों को ऐ टी ऍम मशीन समझने लगे थे,राम देव जी द्वारा योग को पुनः उसके गौरव शाली अतीत से निकाल कर,हम लोगो को उसके सरल स्वरुप से परिचित कराना,एक असली युग पुरुष की ही पहचान है,उनके प्रसंसको में हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई सभी है,लाखो लोगो की एलोपैथिक दवाओं पर निर्भरता कम हुई है,और सबसे बड़ी बात तो ये है की लोगो के अन्दर अपने आप को स्वस्थ रखने की इक्छा जाग्रत हुई है! और कुछ लोग उनके इस सरल रूप को भी पचा नहीं पा रहे है सबके अपने अपने डर और भ्रान्तिया है,अब इसका इलाज भी योग में है तो लेकिन पहल उन्ही लोगो को करनी होगी,लेकिन अपना अहम् को तिलांजलि देकर! राजनीति में आने का उनका फैसला थोड़ी असहजता जरुर उत्पन्न करता है लेकिन इस घोर अन्धकार से भरी हुई राजनीति में एक हलकी सी ही सही लेकिन रौशनी भी जलाता है,रामदेव जी को भी कुछ खोने के लिए तैयार रहना होगा! खैर सबकी तरह मुझे भी इन्तजार है उनके अजेंडे का! अरुणेश जी आप बहुत अच्छा लिखते है अपने तर्कों को बेहद सधे हुए अंदाज में लिखते है आप बधाई के पात्र तो है ही लेकिन दूसरी प्रसंसा मै आपकी इसलिए करूँगा जो आपने आपने लेख का शीर्षक रखा है, "असली असलियत"

के द्वारा:

पवन कुमार जी, आप का शंशय कुछ हद तक सही है. लेकिन आज जब देश हर तरफ भ्रष्टाचार और माफियावाद का राज है तो ऐसे में बाबा रामदेव को मजबूरी में राजनीत में आना पड़ रहा है. ऐसे समय में जब एक महान आदमी, जिसने समाज के सामने अपने को सिद्ध कर दिया है उनके इस नए क्रन्तिकारी कदम का हम सभी को स्वागत करना चाहिए और समर्थन करना चाहिए. देखिये कभी की राजनीती ख़राब नहीं रही है बल्कि बहुत बार राजनीतिज्ञ ख़राब रहे है. एक ऐसा आदमी जो इमानदार हो, कर्मठ हो, देश भक्त हो, वो किसी भी धरम या जाति से आये, हमें ऐसे लोगो का साथ देना चाहिए. जब हमारे और आप के जैसे लोग ही एक इमानदार कोशिश का साथ देगे तभी तो ये गिनती १०० से १००० और १००० से करोडो में पहुचेगी

के द्वारा: Arunesh Mishra Arunesh Mishra

रीता जी की बात से मै एकदम सहमत हु अरुणेश जी ,, ये एक बड़ी समस्या हो गई है हमारे विचारको की की वे नकारात्मक सोच को ही बढ़ावा देने में अपनी बुद्धिजीविता को सार्थक मानते है.... अरे भाई अगर विष के दर से सागर मंथन नहीं होगा तो अमृत कैसे मिलेगा ....? असल में कुछ लोगो को ये बात हजम नहीं हो रही है ....की बाबा राजनीती में आये ..क्योकि सबसे बड़ा नुक्सान उस विदेशी बाजारवादी साम्राज्यवाद को होगा इसी से सभी डरे है और मिथ्या प्रचार कर रहे है उनके खिलाफ.. उन्हें दर है की बिना सत्ता के बाबा ने जब उनकी जड़े हिला दी.... वो भी इतनी की वे उन्हें धमकी देने पे उतर आये... तो फिर सत्ता की शक्ति के साथ बाबा और ज्यादा शक्तिशाली बन जायेंगे और फिर वे अपने स्वदेशी प्रोजेक्ट को जब बढ़ाएंगे तो फिर इन विदेशियों की खटिया कड़ी बिस्तर गोल वाली नौबत आएगी.... अरुणेश जी जबरदस्त ढंग से आपने इस बात को उठाया है उनका विरोध करने वाले सिवा भाषानबजी के और कपोल कल्पना के कुछ भी तथ्य परक नहीं बोल रहे है वे मात्र मीडिया के मिथ्याप्रचार को ही सुन के चिल्ल्ला रहे है जो की प्रायोजित है पूरी तरह से .

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

अरुणेश जी , आपका विचार पढकर बहुत अच्छा लगा . जो सच्चाई है उसे कोई झूठला नहीं सकता. बाबा रामदेवजी युग पुरुष है जिनके निस्वार्थ सेवा के कारण आज हमारे देश का योग विश्व प्रसिद्ध हो गया है. मै हमेशा ही सकारात्मक सोच के पक्षधर रही हू. उनके बताये मार्ग पर मै खुद भी चलकर उपकृत हुई हू . ये और बात है कि किसी - किसी को उनके बताये मार्ग पर चलना अच्छा नहीं लगता. परन्तु इससे उनको कोई फर्क नहीं पड़ता . पिछले दिनों मिहिर राज के लिखे लेख द्वारा स्वामी जी के बारे में उनका जो विचार था वो सम्पूर्ण उनका था . पर मुझे बहुत दुःख हुवा . एक व्यक्ति पूरे देश को रोग से मुक्त रखने कि ताकत रखते है सिर्फ योग के बल पर.यह कोई छोटी बात नहीं है . आपने स्वामी जी के सकारात्मक पहलू को लोगो के सामने रखा.उसके लिए आपको बधाई. रही स्वामी जी का राजनीति में आने कि बात तो उनका यह मौलिक अधिकार है कि वे योग सिखाये या राजनीति करे. क्योकि दोनों ही छेत्र में भारतीय लोगो को लाभ पहुचेगा.

के द्वारा: rita rita

अरुणेश जी क्या शानदार तरीके से अपनी बात कही है आपने इसी मुद्दे को मै भी उठाने वाला था पर शायद इतने शानदार ढंग से नहीं रख पाता...अच्छा ही हुआ ,,,आपको बधाई.... २ वर्ष पहले की एक बात बताना चाहूँगा दुबई में एक बार कुछ कट्टर वादी के प्रभाव में जिस चैनल पे रामदेव जी का योग आता था उसे बंद करवा दिया गया क्योकि इसे इस्लाम के विरुद्ध कहा गया .... लेकिन वहा की स्थानीय जनता ने बहुत आपत्ति जताई और इस कदम का भरपूर विरोध किया परिणाम स्वरुप उसे फिर से रामदेव जी का योग कार्यक्रम शुरू करना पड़ा ..... अब आप इसे क्या कहेंगे ..योग तो पहले भी था पर क्या रामदेव से पहले योग अपने क्रांतिकारी रूप में था... स्विस बैंक में सरकारी धन साद रहा है क्या किसी और ने इस तरह से ये बात उठाई जैसे रामदेव जी ने... असल में कुछ लोगो की समस्या आलोचनाओ में रमे रहने की होती है... २-४ बाबा लोग पकडे गए तो हमारे बुद्धिजीवियों ने पुरे संत समाज को चरित्र प्रमाणपत्र दे दिया की वे सभी काल girls के दलाल है और हिन्दू समाज ये हो गया वो हो गया .... ये हमारे नवउदारवादी विचारक है.. बाबा रामदेव जी ने राजनीती में आने का निर्णय लिया तो हंगामा हो गया हर मंच के विचारक एक स्वर में इससे बाबा की चाल, असलियत ..और जाने क्या क्या नाम देकर लिखने लगे जैसे वे कोई आतंकवादी हो ,,,अरे भाई जब सैकड़ो माफिया , हत्यारे संसद की शोभा बढ़ा रहे है तो रामदेव जी से क्या समस्या हो गई .. कम से कम उनकी हिम्मत की दाद तो देनी ही चाहिए..... आपकी बात को कुछ इस तरह कहना चाहता हु.......उनपे जो लोग केवल आलोचना को ही ध्येय मानते है की ,,,इस तरह हमने अपनी हस्ती बना डाली किसी अपने से बड़े पर कीचड़ उच्छाल कर , एक बार फिर आपकी पोस्ट के लिए बधाई

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

खालिद साहब, मै भी उन लोगों के साथ नरमी के पक्ष में बिलकुल नहीं हूँ. जिन्होंने इतना बाद दुस्साहस किया है उनको सजा मिलनी ही चाहिए. मेरा तो बस ये माना है की सरकार ऐसे रस्ते पर चले जिससे नस्सल्वाद को जड़ से ख़तम किया जा सके और कम से कम हमारे सुरक्षा बालो को अपनी जान देनी बड़े. बिना पूरी तयारी और सही रणनीति के, देश ऐसे ही जवानों को खोता रहेगा और आप नस्सल्वाद कुछ समय के लिए बड़ा तो देगे लेकिन खतम नहीं कर पाएगे. अभी ऑपरेशन ग्रीन हंट का प्रारूप दो ऐसे गुटों को एक दुसरे पर गोली चलने पर मजबूर कर रहा है जो सीधे सीधे एक दुसरे के दुश्मन नहीं है. ये मानना बाद ही कठिन है की इन इलाको के ४००० से ५००० आदिवासी विदेशी ताकतों के हाथ जा बिके. जो लोग बिके होगे तो मुठी बार से जयादा नहीं होगे जो इस ऑपरेशन ग्रीन हंट के बाद भी बच जायेगे. और उनसे पहले वो सब बच जायेगे जिन्होने इन इलाको में आतंक का राज कायम किया जिससे की आज वहां नस्सल्वाद इतना फैला है. लेकिन इस ऑपरेशन में मरेगे निर्दोष सुरक्षाबल और कभी बन्दुक वाले आदिवासी या कभी रोटी को तरसते हाथ वाले आदिवासी.

के द्वारा: Arunesh Mishra Arunesh Mishra

वत्स जी, आप की बात से सहमत हूँ, कृष्ण के गीता मे जब ये कहा की युद्ध का विजय ही धरम है तो हम को सब से पहले ये सोचना चाहिए की, कृष्ण ने तब कहा था जब वो धरम के साथ थे और अधरम के खिलाफ लड़ रहे थे. मेरी सारी सहानभूति उन शहीद हुए सिपाहियों के परिवार के साथ है जिन्होंने अपने देश के लिए जान दी. मै आत्मा से उनकी शहादत को सलाम करता हूँ. आप ने ऊपर लिखा है की निर्दोष लोगो के खिलाफ होते अत्याचारों पर हमको आवाज उठानी चाहिए और यही मै अब भी कहता हूँ. लेकिन आप को सच जानने के लिए इस ऑपरेशन ग्रीन हंट से थोडा और पीछे जाना पड़ेगा जब गरीब आदिवासी पहले अपने ऊपर होते असीम अत्याचारों के खिलाफ कानून के पास गए फिर सफेदपोश नेताओ के पास...और सभी रस्ते बंद होने के बाद बन्दूक उठाई...मै उनके बन्दुक उठाने और सिस्टम के खिलाफ जाने का कतई समर्थन नहीं करता हूँ लेकिन जब मंत्री जी दिल्ली में बैठ के बिना जमीनी हकीकत जाने ऑपरेशन ग्रीन हंट का आदेश दे देते है, ये जानते हुए भी की हमारे अर्धसैनिक बालो को न तो उस इलाके के बारे में जयादा पता है और न ही वो इसके लिए ट्रेंड है. उनकी इस चूक का नतीजा कोई और नहीं देश के बहादुर सिपाही अपनी जान दे कर चुका रहे है. बस यही निवेदन करूंगा आप से की समस्या जितनी बड़ी होती है, उसको हल करने के लिए उतनी ही संजीदगी की आवश्यकता होती है. अगर हम वाकई भारतवर्ष के हितैसी हैं तो हमें ये ध्यान रखना होगा की कही जोश के मरे हम अपने होश न खो दे. सरकार को एक ऐसा हल निकलना कहिये जिससे इस तरह सुरक्षबलो पर होने वाले हमले भी रोके और कम करे जा सके और नस्सल्वाद से की समस्या को भी हल किया जा सके. लड़ाई लड़ी कही भी जाये लेकिन वो जीती बंदूक से नहीं बल्कि दिमाग से जाती है.

के द्वारा: Arunesh Mishra Arunesh Mishra

जसबीर जी मैंने लिखा था की इन जवानों का नस्सल्वाद से कोई लेना देना नहीं है और वो भी इस बिना पर की, ये ४ या ५ राज्य जो नस्सल्वाद की चपेट में है उन राज्यों में न तो इन अर्धसैनिक के जवानों के कोई जमीन हथियाई है और न ही वहां जाकर किसी आदिवासी की हत्या या कोई और हनी पहुचाई है. ये सब करने वाले कोई और हाथ और कोई और दिमाग है, लेकिन सरकार की भ्रष्टाचार और अत्याचार के खिलाफ नरम नीतियों ने आज यह स्तिथी कड़ी कर दी है की सालो तक दबा रहने वालो आन्दोलन आज इतना उग्र हो कर लोगो का हूँ बहा रहा है. मै एक पल के लिए भी नहीं सोचता की उन ८० पुलिस के जवानों की हत्या का कोई भी सही कारन हो सकता है और अपराधी कोई भी हो कैसे भी हो अपराधियों को सजा मिलनी ही चाहिए, मेरा तो बस ये मानना है की सरकार के बस एक गलत निर्णय की वजह से इन सैकड़ो निर्दोष लोगो का खून आज बह रहा है. इसको रोका जा सकता था अगर सरकार सही तरीक से इस समस्या का हल दूंदने की कोशिश करती.

के द्वारा: Arunesh Mishra Arunesh Mishra

जनाब, आपने मेरी पिछली प्रतिक्रिया डिलीट कर दिया था जिसमे मैंने आप जैसे छद्म मानवाधिकारवादियों पर संदेह व्यक्त किया था तथा किसी भी प्रकार से अराजक लोगों के सफाए की बात कही थी. आप जैसे लोग वास्तव में निर्दोष लोगों के विरुद्ध की जा रही ज्यादतियों के खिलाफ नपुंसक बन जाते हैं और आतंकियों का समर्थन कर उनके लिए सहानुभूति पैदा करने की कोशिश करते हैं. याद रहे कि देश ऐसे लोगों को ज्यादा समय तक बर्दाश्त करने की हालत में नहीं है. जब विस्फोट होगा तो सबसे पहले ऐसे ही समर्थकों का सफाया होगा क्योंकि ऐसे लोग नक्सलियों और आतंकियों तथा अपराधियों के हित में काम कर रहे हैं. देश में इन्हें पनाह देने वाली ताकते सावधान हो जाएं क्योंकि अब पानी सर से ऊपर चढ़ चुका है. भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा है कि किसी भी रीति से युद्ध में विजय पाना ही धर्म है. और अब इस धर्म को निभाने का समय आ चुका है.

के द्वारा:

arudesh ji apne kya khub likha hai, wakai aj is bat per bahas kyo nahi hoti kiabhi pichale grih mantri nr kaha tha ki naxlwad itani badi samsya nahi hai jise itana badha chdha ker kaha ja raha hai.Ekaek klya ho gaya ki chidumburum jinhe videshi atankvadio se ladane ke liye laya gaya we aj us morche per ppude blast ke bad bat nahi karana chahte wahi ekaek naxlwadi desh ke liye sabse bada khatara ban jat hai.Hairat hoti hai in tathakathit budhjiwio per jo dewal per likhi ibadat nahi pasdh pa rahe hai.Are bhai mantri banne kr thik pahale chidumbrum mahashay Vedanta ke board of directurs me rahe hai,jo puri duniame paryayvarad ke nash ki jimmedar rahi hai,aur us hatyari bhopal ke gas pidito ke khilf enran company ke vakil rahe hai.Inake liye jab begunah gas oidit apne liye koi daya nahi pa sake to inaki nigah me to naxlwadi to bahut bade apradhi hai kyoki ye log Vedanta aur tamam deshi videshi co. ke munfe me roda ataka rahe hai.inko 30 sal isliye bardast ker liya lekin ab inaki aukat itani badh gayi ki videshio ko bhi lutane me roda ban rahe hai.MAnmohan aur sonia ki dili ikcha ka samman hi to ker rahe hai.ye log ajmal Kasav ko to jail me biriyani khila sakate hai lekin nxalwadio ke liye to mukadame ka natak bhi inhe gawara nahi.opretion green hunt me jo bhi mara jayega use nxlwadi mana jayega yahi Sonia mata ka nirdesh hai bechare chadumburum to sirf apne purane malik se vafadari aur aye ke adesho ka palan ker rahe hai.ye log pure desh ko vikshit ker chuke hai matra wahi ilaka bacha haijisaka vikas nxlvadi nahi karne de rahe hai.vaise kya green hunt safal hoga mujhe to nahi lagata kyoki jaha adivasi apne astitywa ki ladai lad rahe hai wahi congress sarkar videshio aur pujipatio ki dalali ker rahi hai.chidumberum mahoday khtm ho jayege lekin jab tak shoshd aur lut ki vyavasth kayam rahegi nxlwad bhi rahega,ha chidubrunm jaise darjano ayege jyege.inlogo klo shayad purva rashtrpti R.Vyankatraman ki wo bat yad nahi kiabhaw ke samudra me vilasita ke tapu adhik din nahi chal sakate ek jhoka ayega aur sab tahas nahas ker dega.

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श्रीमान अरुणेश , आतंकवादी और नक्सलवादी किसी भी राष्ट्र में हों वे नासूर से भी अधिक **** होते हैं. ना केवल इनको बल्कि इनके घर-परिवार सहित इन्हें दौड़ा -दौड़ा कर मार डालना चाहिए. इतना ही नहीं इनके पूरे खानदान का सफाया जरूरी है. एक सबसे जरूरी बात जो इनके हिमायती हैं उन्हें सबसे पहले मारना आवश्यक है ताकि इनका कोई भी सपोर्टर ज़िंदा ना रहे. आतंकवादियों के कमीनेपन को वही महसूस कर सकता है जिसके घर का कोई मरा हो इनके **** के कारण. ये दौलत के लालची सिर्फ अपने स्वार्थ के कारण ह्त्या जैसा जघन्य अपराध करते हैं. इन्हें माफ़ करने वाला इनके कृत्य का समर्थक माना जाना चाहिए और वह भी इसी व्यवहार का हकदार है. फिर से विचार कीजिए कि व्यवस्था से कोई पीड़ित हो और उसके बदले आपके व हमारे घर वालों की ह्त्या करे तो क्या आप माफ़ कर देंगे ऐसे राष्ट्र व मानावाताद्रोहियों को?

के द्वारा:

मिश्रा जी, आपने तो बहुत सरलता से कह दिया कि आंतकवादियों और नक्सली दोनों ही समाज के "बेचारा" है; होते है इनके प्रति नरमता बरतनी चाहिए. लेकिन एक बात बताइए नक्सली अगर आतंकवादी नही तो क्या है. क्या अपनी बात मनावाने के लिए हिंसा का रास्ता अपनाना सही हैं. हम और आप तो यहां बैठे रहते है जो मन में आता है लिखते है पर क्या सोचा है कि आखिर उन निर्दोष लोगों का क्या कसुर होता है जिन्हें यह नक्सली बिना वजह मार डालते हैं. किसी का गुस्सा किसी और के ऊपर निकालना बिलकुल भी जायज नही हैं. आप कैसे नक्सलवाद को सही और जायज ठहरा सकते है , आखिर क्या मानवता के कुछ मायने नही रहे ? यह नक्सली जो आए दिन महिलाओं और बच्चों को अपना हथियार बना राज्यो का इतना नुकसान करते है उनमें आपको मानवता नजर आती है . बडे तो छोड दिजिए यह नक्सली अपना हथियार बनाते है बच्चों और महिलाओं को . आज जो सरकार कर रही है उससे नाने वाले दिनों में कई जानें बचेंगी.ग्रीन हंट सही है और अगर आप को लगता है कि यह गलत है तो जरा सोच के देखिए किअगर आप नक्सलवाद के शिकार होते तो कैसा लगता आपको.7

के द्वारा:

अरुणेश जी आपके विचार एक हद तक सही है.... पर हमें ये भी सोचना होगा की अब जब नक्सलवादी गतिविधिया एक बड़े क्षेत्र पर अपनी गतिविध्य अंजाम देने लगी है और वे सारी वार्ता अपनी शर्तो के आधार पर ही करना चाहते है तो सरकार के सामने मजबूरी बन जाती है........... कठोर निर्णय लेने की....आपकी इस बात से मै पूरी तरह सहमत हु की गरीबी और सरकारी गैरजिम्मेदारी नक्सलवाद की समस्या का सबसे प्रमुख कारन है पर अगर इसे रोका नहीं गया और उनकी शर्तो के सामने सरकार झुक गई तो फिर इस देश में जो आर्थिक विषमता बड़े खतरनाक स्तर पर जा पहुची है देश के हर हिस्से में लोगो को इसबात के लिए प्रेरित करेगी की की वे हरदम अन्याय के खिलाफ बन्दुक उठा ले.... इस तरह एक खतरनाक परंपरा बन जाएगी....नक्सलवाद का समाधान केवल बन्दूक से नहीं हो सकता ये उतना ही बड़ा सत्य है जितना ये की नक्सलवादियो के सामने सरकार का हमेशा नर्म रुख रखना गलत होगा.... उन कसरतो से माफियाराज को ख़त्म करके वह के लोगो को व्यवस्था मुहय्या करना बहुत जरुरी है..... पर इसका कारन राजनितिक इच्छाशक्ति की कमी ही है

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY




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