Best Web Blogs    English News

facebook connectrss-feed

विचार भूमि

पहले राष्ट्र..

49 Posts

485 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

| NEXT

महिला आरक्षण बिल के पेंच

  • SocialTwist Tell-a-Friend

केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा में पास करवा कर अवश्य ही अपने इरादे जाता दिए है। सरकार की इस उपलब्धि के लिए सत्ता पक्ष के साथ साथ विपक्षी दल भी बराबर के हकदार है। केंद्र ने जिस तरह से इस प्रस्ताव को लोकसभा में पास करवाया है, कई लोग इस तरीके को अलोकतांत्रिक कह रहे हैं,  लेकिन जिस तरह का विरोध बागी सांसद जन कर रहे थे उसको भी कोई लोकतान्त्रिक नहीं कह सकता है।

भले ही सरकार ने यह बिल राज्यसभा में पास करवा लिया हो लेकिन लोकसभा में इसको पास करवाना अभी भी एक दूर की कौड़ी है। केंद्र निश्चय ही इस बिल के लिए अपने पुराने सहयोगियों की नाराजगी मोल लेना नहीं चाहती। इसलिए इस बिल को लोकसभा में पास करवाने से पहले आम सहमती बनवाना चाहती है.

भारत का आज का राजनीतिक परिद्रश्य पूरी तरह से वोट बैंक की विचारधारा पर निर्भर है। महिला अरक्षद बिल भी वोट बैंक की राजनीती से अछूता नहीं है। आर जे डी , सपा और जनता दल का एक खेमा पूरी ताकत से इस बिल के विरोध में खड़ा है। यहाँ पर विरोध सामाजिक नहीं बल्कि राजनैतिक अधिक है।

यह सभी क्षेत्रीय दल  इस बात से शशंकित है  की अगर यह बिल कानून के रूप में लोकसभा में पास हो जायेगा, तो  इस कानून की सबसे ज॒यादा मार इन राजनीतिक दलों पर पड़ेगी.     अगर हम किसी भी क्षेत्रिय दल में महिला नेताओ की गिनती करे तो यह दहाई तक भी नहीं पहुचती है। इन दलों यही डर सता रहा  है की अगर यह बिल लोकसभा में पास हो गया तो अगले लोकसभा में उनको जीत जीत दिलाने वाले उमीद्वारो का टोटका पड़ जायेगा।

सत्ता पक्ष और ताकतवर विपक्ष के गठजोड़ को तोड़ने के लिए, लालू प्रसद यादव जी,  मुलायम सिंह यादव जी ने एक नया फ़ॉर्मूला दिया है और वह है आरक्षण के अन्दर आरक्षण. इन राजनेताओ को यह पता है की भाजपा कभी भी इस बात को स्वीकार नहीं करेगी, और भाजपा का विरोध इस बिल को ठन्डे बसते में डालने के लिए काफ़ी होगा.

 
केंद्र सरकार अगर सच्चे मन से इस बिल को पास करवाना चाहती है तो उसको पूरी इक्षाशक्ति के साथ में इस बिल को लोकसभा के पटल पर जल्दी से जल्दी लाना होगा। सरकार को जन भावना और राजनीतिक भावना के अंतर को समझाना चाहिए और यह बिल लोकसभ शीघ्रा-तिशीघ्र पास करवाना चाहिए।



Tags:                     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (5 votes, average: 3.60 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • Share this pageFacebook0Google+0Twitter0LinkedIn0
  • SocialTwist Tell-a-Friend

| NEXT

Post a Comment

*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Manoj के द्वारा
March 22, 2010

हे भगवान यह बिल तो आब पास हो चुका है अब न जाने यह राजनेतागण मरे मुर्दे उखडने में क्यों लगे हैं? आखिर इस बिल से किसी का क्या जा रहा हैं.




  • ज्यादा चर्चित
  • ज्यादा पठित
  • अधि मूल्यित