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अन्ना के साथ - डलास टेक्सास से...

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भ्रष्ट, घमंडी और निक्कमे सत्ताधीशो से इस समझ की उम्मीद करना बेईमानी ही होगी कि वो गीता के इस सूत्र को समझेगे, “अभिमानी का विनाश कोई और नहीं उसका अभिमान करता है”. अन्ना के खिलाफ अनावश्यक और गैर-जिम्मेदार बयान देने के बाद सरकार का तथाकथित “थिंक टैंक” नदारत और दिशा-विहीन है. पिछले कई दिनों से देश में छिड़ी क्रांति के बीच में, एक बार भी सरकार का कोई भी नुमाइन्दा देश को यह भरोसा दिलाने के लिए आगे नहीं आ पाया है, कि हाँ हम मानते है कि भ्रष्टाचार ख़तम हो सकता है और हम उसे ख़तम करने के सारे उपाय करेगें.

प्रधानमंत्री जी की तो सबसे बड़ी यही समस्या है की उनके पास कोई “जादू की छड़ी नहीं है”, लेकिन उनके मंत्रियो और सांसदों के पास “काला जादू” जरूर है, जिससे वो देश की सम्पति को दीमक की तरह से चाट किये जा रहे है. सरकार का पूरा प्रयास है की वह भ्रष्टाचार की इस लड़ाई को “अन्ना बनाम संसद” कर दे, और देश के सामने यह झूठ फैला पाए, कि अन्ना लोकतान्त्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है. यह तो तय है, सरकार प्राथमिकता भ्रष्टाचार ख़तम करना नहीं बल्कि आने वाले विधानसभा चुनाव और पार्टी का चंदा है. सरकार ने अभी-अभी एक और चाल चली है, सोनिया गाँधी जी के नीचे काम करने वाले कुछ समाजसेवकों को अन्ना के खिलाफ मैदान में उतरा है. नीति साफ़ है “फूट डालो और राज करो”. सरकार अन्ना से निपटना चाहती है न कि भ्रष्टाचारियो से.

अन्ना आज, हमारे कल के लिए “राम लीला” मैदान पर डटे हुए है. वह इन्सान जिसने अपना सारा जीवन देश को समर्पित कर दिया है, वह देश से समर्थन चाहता है. अगर आज हम राष्ट्र के लिए सड़को पर नहीं उतरे तो आने वाला कल निश्चय ही शर्मसार करने वाला होगा. आज देश की जरूरत है अधिक से अधिक लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ इस मुहीम में जुड़े और सरकार के कुतर्को और चालबाजियो का करारा जवाब दे. इस आन्दोलन से जुड़ने के लिए न तो आप को न तो स्यंभू नेता बनने की जरूरत है और न हिंसा फ़ैलाने की, सिर्फ चाहिए तो थोड़ी इक्षाशक्ति और कुछ समय.

अब देश की दूसरी आजादी की की लड़ाई सिर्फ भारतवर्ष तक ही नहीं सीमित है, सारी दुनिया में बसने वाले भारतीय अन्ना के साथ है. मै और मेरे कुछ मित्रो ने डलास – टेक्सास(USA) में भ्रष्टाचार के खिलाफ और अन्ना के समर्थन में एक मार्च का आयोजन किया जिसे जबरदस्त समर्थन मिला. उम्मीद करता हूं, मेरे दोस्त और मेरा परिवार भी हिंदुस्तान में देश की इस दूसरी आज़ादी के लिए और ताकत से खड़ा होगा और तब तक डटा रहेगा जब तक हम एक सशक्त लोकपाल नहीं पा जाते.

कुछ फोटो आप लोगो के साझा कर रहा हूं, जो हम लोगो ने खीची भारत सरकार को भेजने के लिए और यह दिखने के लिए की अन्ना को सर्मथन सिर्फ भारत से ही नहीं बल्कि सारी दुनिया से मिल रहा है.



जय हिंद..



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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendr shukla bhramar5 के द्वारा
August 26, 2011

अरुणेश जी सुन्दर ..धमाकेदार बुलंद और बेबाक बातें ..जितना भी शतरंज की चाल है वे तो खेलेंगे ही लेकिन आत्म विश्वास अपने अन्दर भरना होगा की हम जीतेंगे ..आज नहीं तो कल ..ये तो आगाज है ..दिया तो जल चुका है ..बुझे न बस .. धन्यवाद आप का भ्रमर ५

    Arunesh Mishra के द्वारा
    August 27, 2011

    धन्यवाद भ्रमर जी, आज के संसद सत्र का इंतजार है देखते है, संसद का दम भरने वाले नेता देश की आवाज को कितना समझ पाए है.

वाहिद काशीवासी के द्वारा
August 22, 2011

अरुणेश भाई, अपनी काली करतूतों का कच्चा चिट्ठा खुलने के डर से सत्तासीन नेता हर उस चीज़ की मुख़ालिफ़त करने के मौके़ खोजते फिर रहे हैं जिस से वो खुद को बचा सकें। मगर वे जान कर भी अनजान बन रहे हैं। अब वो दिन दूर नहीं है जब उनके कारनामे सारे देश के सामने आ जाएँगे। आभार सहित, वंदे मातरम…

    Arunesh Mishra के द्वारा
    August 27, 2011

    वन्देमातरम वाहिद भाई…अरे बेशर्मी किसे कहते है इन मौका परस्त नेताओ से सीखिए…देश खड़ा हो रहा है..कुछ तो निकल के आयेगा..

ashutoshda के द्वारा
August 22, 2011

अरुणेश जी वास्तव में गांधीजी ऐसे व्यक्ति थे जिनके बारें में बाहर रह रहे भारतियों से अब भी पूछा जाता है और जब उन्हें बताया जाता है की किस तरह एक निहत्थे आदमी ने देश से बहारी हुकूमत को भगाया था तो वो आश्चर्य चकित रह जातें है आज देश के ही नहीं पुरे विश्व के युवा गांधीजी के चलाये आन्दोलन को अन्ना हजारे के आन्दोलन के रूप में पुनह देख रहे है ऐसे में इनका समर्थन करना लाजमी है आज माजूदा सरकार के युवा नेता समझ गए होंगें की देश ही नहीं विदेश का भारतीय युवा किसके साथ है आशुतोष दा

    Arunesh Mishra के द्वारा
    August 27, 2011

    आशुतोष दा कोई शक नहीं, यह आन्दोलन सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ देश की सोच को दिखता है बल्कि यह भी बताता है की आज भी देश के युवाओं में देश के लिए ज़ज्बा है, जोश है.

nishamittal के द्वारा
August 22, 2011

अरुणेश जी देश से बाहर रहते हुए देश की चिंता करना ! बहुत अच्छा लगता है,भारत में रहते हुए जिम्मेदार पदों पर आसीन नेता तो बस गद्दी हमारी बची रहे देश जाय भाड़ में.देश से बाहर भी लोग सक्रिय हैं जान कर अच्छा लगा.बधाई आपको और जन्माष्ठमी की मंगलकामनाएं

    Arunesh Mishra के द्वारा
    August 27, 2011

    धन्यवाद निशा जी…आज के संसद सत्र का इंतजार है…

Santosh Kumar के द्वारा
August 21, 2011

श्री अरुणेश जी ,..उत्साह बढ़ने के लिए ,.हार्दिक आभार ,….सरकार का थिंक टैंक अब साजिशों ,प्रपंचों ,कुतर्कों पर ही सोच रहा है ,..अहंकारी का विनाश निश्चित है ,..विनाश काले विपरीत बुद्धि ,….जबाब केवल एकजुटता से दिया जा सकता है ,…सादर धन्यवाद

    Arunesh Mishra के द्वारा
    August 21, 2011

    धन्यवाद संतोष भी. मुझे उम्मीद ही नहीं विश्वास भी है की आप भी देश की इस दूसरी क्रांति में हिस्सा ले रहे होगे.


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